हमारी अकादमियाँ और संस्थान

हमारी अकादमियाँ और संस्थान

कालिदास अकादमी, उज्जैन (म.प्र. संस्कृति परिषद्)

महाकवि कालिदास हमारी राष्ट्रीय विरासत के महानतम भण्डार के रूप में ज्ञात हैं। वे आज भी भारतीय संस्कृति के महानतम प्रतिनिधि के रूप में प्रकाशमान हैं। उनकी स्मृति को दृष्टिगत रखते हुए म.प्र. शासन के संस्कृति विभाग ने वर्ष 1978 में उज्जैन में कालिदास अकादमी की स्थापना की। उज्जैन में कालिदास अकादमी के पीछे दो उद्देश्य थे, एक तो यह की इस महाकवि, नाटककार कालिदास की स्मृति को कालजयी बनायी रखी जा सके, दूसरा यह की उज्जैन में एक बहुआयामी संस्था को स्थापित किया जाये ताकि कालिदास को केंद्र में रखकर सम्पूर्ण शास्त्रीय परम्पराओं को सम्पूर्णता में प्रदर्शित किया जा सके । इस अकादमी में शस्त्रीय संस्कृत तथा पारम्परिक साहित्यिक विचारधारा के क्षेत्र में शोध कार्यों व अध्ययन के लिए सुविधाएं प्रदान की जा सकें। इसके साथ ही कला तथा मंचीय कला की परम्परा को बनाये रखने तथा विभिन्न संस्कृतियों व भाषायी परिपेक्ष्य में उसका समकालीन समय में उनका अनुरूपण किया जा सके ।


आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी

मध्य प्रदेश शासन के संरक्षण में आदिवासी लोक कला अकादमी की स्थापना सन 1980 में की गयी। इस अकादमी का मुख्य लक्ष्य व उद्देश्य, जनजातीय कला को प्रोत्साहन, संरक्षण व प्रोत्साहन प्रदान करना है। यह अकादमी सर्वेक्षण संचालित करती है, विभिन्न आयोजन कार्यक्रम आयोजित करती है तथा जनजातीय कला के विभिन्न पक्षों पर केंद्रित विविध लेखन सामग्रियों तथा लेखों का प्रकाशन करवाती है। यह अकादमी राज्य शासन द्वारा निर्धारित सभी मापदंडों व निर्देशों का अनुपालन करती है। इस अकादमी ने जनजातीय तथा लोक कला पर आधारित आदिवर्त के नाम से एक राज्य संग्राहलय की स्थापना की है तथा इसके अतिरिक्त ओरछा में साकेत के नाम से रामायण कला संग्राहलय भी स्थापित किया है।


साहित्य अकादमी

राज्य के साहित्यकारों तथा साहित्य के संरक्षण, प्रोत्साहन तथा विकास के उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति के लिए मध्य प्रदेश शासन ने साहित्य अकादमी के रूप में मध्य प्रदेश साहित्य परिषद का गठन किया गया है। इसकी प्रथम स्थापना तत्कालीन मध्य प्रदेश की राजधानी नागपुर में सन 1954 में की गयी थी। वर्ष 1956 में नये मध्य प्रदेश राज्य के गठन के बाद इस परिषद को राजधानी भोपाल में स्थानांतरित कर दिया गया। तब से अपनी विभिन्न दूरगामी गतिविधियों के माध्यम से यह अकादमी राज्य के साहित्यिक व सांस्कृतिक परिवेश में अपनी समर्पित उपस्तिथि की पहचान बनाये रखने में सफल रही है।


मराठी साहित्य अकादमी

मध्यप्रदेश के गठन से ही प्रदेश के निर्माण में मराठी भाषियों का अपना एक स्थान एवं महत्व रहा है। मध्य भारत से मध्यप्रदेश के निर्माण के समय नागपुर तथा अन्य स्थानों से मध्यप्रदेश में आये में मराठीभाषी लोगों की संख्या बहुतायत में है। मराठीभाषी भोपाल, इन्दौर, उज्जैन, देवास, रतलाम, धार मन्दसौर, हरदा, खण्डवा, बुरहानपुर, होशंगाबाद, इटारसी, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, बैतूल, मुलताई आदि जिलों में बहुतायत से निवास करते हैं। मराठी संस्कृति एवं साहित्य को अक्षुण रखने तथा उन्हें बढ़ावा देने एवं उनका संवर्द्धन करने के उद्देश्य से साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् के अन्तर्गत मराठी प्रभाग वर्ष 2008 से कार्यरत था। वर्ष 2010 से इसका विस्तार करने हेतु मराठी साहित्य अकादमी का गठन शासन द्वारा किया गया।

अकादमी द्वारा मराठी प्रभाग के गठन से ही मराठी साहित्य संस्कृति को बढ़ावा देने उनका संवर्द्धन करने तथा परम्परा को अक्षुण रखने के उद्देश्य से विभिन्न आयोजन किये जा रह है, जिससे प्रदेश में निवासरत मराठी भाषियों को स्थाई मंच प्राप्त हो सके साथ ही प्रदेश से बाहर की पारंपरिक कलाओं से भी प्रदेश के मराठीभाषी एवं अन्य लोगों को अवगत कराया जा सके।