श्री रामलीला उत्सव

संस्कृति संचालनालय

श्री रामलीला उत्सव (10 - 16 अक्‍टूबर,2017)

राम राज्याभिषेक के साथ ही सात दिवसीय रामलीला का समापन

16 अक्‍टूबर,2017

रवीन्द्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर विगत 10 अक्टूबर से चली आ रही रामलीला का आज समापन हो गया। लवकुश रामलीला समिति दिल्ली द्वारा आयोजित यह रामलीला भव्यता और प्रभावों की दृष्टि से अब तक भोपाल में मंचित रामलीलाओं में सबसे श्रेष्ठ रही है। उल्लेखनीय है कि पहली बार यह समिति चांदनी चैक के अपने मूल स्थान से भोपाल रामलीला का प्रदर्शन करने आयी है।

विगत छः दिनों में नारद मोह से लेकर विविध प्रसंगों के माध्यम से इस मण्डली ने रामचरित मानस के विविध प्रसंगों को मंचित किया। इनमें श्रीराम जन्म, अहिल्या उद्धार, राम वनवास, पंचवटी प्रसंग, सीता हरण, बालि वध, सीता हरण, रावण-हनुमान संवाद, लंका दहन, रामसेतु बंधन, रावण अंगद संवाद, लक्ष्मण शक्ति कुम्भ्करण वध आदि प्रसंग शामिल थे। समापन दिवस समिति ने मेघनाद वध, अहिरावण एवं रावण वध तथा राम राज्याभिषेक आदि प्रसंगों साथ प्रस्तुत किया।

पहले दिन से जो प्रवाह और वेग इस रामलीला को मिला था, आज उसके उपसंहार कर दिन था। रावण वध और राम का राज्याभिषेक हर रामलीला की चरम परिणति है। दर्शकों को उसी घटनाक्रम का इन्तजार था। जब वह समय आया, तमाम नसीहतों और अच्छी सलाहों को ठुकराते और दरकिनार करते हुए रावण जब राम से युद्ध करने लगा तो उसकी हार सुनिश्चित थी, उसका पराजित होना अवश्यम्भावी हो गया। रावण के गिरते ही राम की सेना में खुशी की लहर छा गयी। सब ने उत्साह से ताली बजाकर ईश्वर के इस फैसले का स्वागत किया। उसके बाद राज्याभिषेक एवं भव्य आरती के साथ ही रामलीला का समापन हुआ।

आज भी रामलीला के विभिन्न कलाकारों का मंच पर आने से पहले कलाकारों के बीच से होते हुए जाना कौतुहल का परिचायक रहा। सभी ने कलाकारों की सहजता और सद्व्यवहार का आनंद लिया, सेल्फी खींची। इस रामलीला में सभी चरित्रों के साथ आम जनता ने स्वयं, परिजनों तथा बच्चों के साथ फोटो, सेल्फी आदि के द्वारा अपने उत्साह को प्रदर्शित किया। यह रामलीला इस प्रकार दर्शकों को जोड़ने मे कामयाब रही तथा उनके बीच अपनी छाप छोड़ने में सफल हुई।

दर्शकों में जिस तरह से गणेश, हनुमान, ताड़का, शूर्पणखा के चरित्रों का क्रेज था वह काफी दिलचस्प था। यह आयोजन संस्कृति विभाग द्वारा आदिवासी लोककला एवं बोली विकास अकादमी के संयोजन में किया गया था।